ड्यूटी से टाइम निकालकर गरीब बच्चों को पढ़ाता है ये आईपीएस अधिकारी

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जिंदगी में शिक्षा की अहमियत क्या होती है इसके बारे में एक एक सिविल सर्वेंट से ज्यादा भला और कौन जानता होगा! खासौतर पर वो सिविल सर्वेंट जो खुद आभावों में पला-बढ़ा हो। हालांकि एक ऐसे ही आईपीएस अधिकारी हैं जो समाज में मिसाल पेश कर रहे हैं। देश के उज्जवल भविष्य निर्माण में बच्चों को शिक्षित करने के महत्व को समझते हुए, ये आईपीएस अधिकारी शिक्षा में सुधार की दिशा में काम करने के लिए अपनी ड्यूटी से समय निकालकर बच्चों को पढ़ाता है। पटना के रहने वाले संतोष कुमार मिश्रा 2012 बैच के आईपीएस अफसर हैं, जो अभी उत्तर प्रदेश के आंबेडकर नगर जिले में कार्यरत हैं। संतोष के पिता लक्षमण मिश्रा आर्मी से सेवा निर्वृत हो चुके हैं और उनकी माता घर संभालती हैं।

संतोष ने अपनी प्रारभ्मिक शिक्षा बिहार से ही करने के बाद मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढाई के लिए पुणे चले गए थे। 2014 में इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद संतोष ने ४ साल तक यूरोप और न्यू यॉर्क में काम कि। बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर, संतोष को अमेरिका में सालाना पचास लाख रूपये मिलते थे। फिर भी अपने देश के लिए काम करने की सोच उन्हें 2011 में वापस अपने वतन खींच लायी। वापस आपकर उन्होंने सिविल सर्विस का एग्जाम दिया और पहले प्रयास में सफलता प्राप्त कर ली। जब वो अमरोहा में कार्यरत थे, तभी पांचवी कक्षा के छात्र ने उनसे शिकायत की कि उसका दोस्त पिछले 15 दिनों से स्कूल नहीं आ रहा।

छोटे बच्चे के इस मासूम सी शिकायत पर जब संतोष ने जांच की, तो उन्हें पता चला कि आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण वो बच्चा अपने पिता की मिठाई की दुकान में हाथ बंटा रहा है। फिर संतोष ने उसके पिता से बात की और इस बात का आश्वासन लिया कि बच्चा अगले दिन से स्कूल जायेगा। इस घटना ने संतोष को राज्य में शिक्षा की सुधार की क्षेत्र में काम करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद जब ससंतोष का तबादला आंबेडकर नगर में हुआ, तो उन्होंने प्राइमरी स्कूल में जाकर बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। मज़ेदार बात तो तब हुई, जब संतोष से बच्चों ने पढाई शुरू करने से पहले जलेबी की मांग की।

उन्होंने इन बच्चों को स्कूल बैग दिलाया और उन्हें गणित पढ़ाना भी शुरू किया। संतोष का काम समाज में नियम और कानून की गरिमा बनाये रखना हैऔर वो अपने काम को अपना परम कर्तव्य भी मानते हैं, पर संतोष ने जिस तरह बच्चों की शिक्षा का बीड़ा उठाया है, वो काफी सराहनीय है. संतोष जैसे अधिकारी वाकई इस समाज को बदलने का जज़्बा रखते हैं, संतोष के इस जज़्बे को हमारा सलाम है।

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