पिता ने कहा- गम है…अब देश को कोई सिपाही नहीं दे पाऊंगा

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चार फरवरी को पुंछ बार्डर पर पाकिस्तानी फौज के साथ मुठभेड़ में आर्टीलरी रेजिमेंट के जवान केके मुन्ना शहीद हो गए थे। मंगलवार को दानापुर छावनी में शहीद को सलामी के बाद उनका पार्थिव शरीर गांव लाया जाएगा। यहां शहीद का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ मानसी गंगा घाट पर किया जायेगा। शहीद के पिता ने बताया कि वे बचपन में बेटे को देशभक्ति गीत सुनाते थे। बता दें कि वर्ष 2013 में किशोर कुमार मुन्ना की बहाली आर्मी के जीडी पद पर हुई थी।

पिता ने कहा- गम है… अब देश को कोई सिपाही नहीं दे पाऊंगा

– शहीद के गांव ब्रह्मा में सोमवार की सुबह एक अजीब सा सन्नाटा छाया हुआ था। सुबह के 10 बज रहे थे और नागेश्वर यादव अपने बथान पर कई लोगों के साथ बैठे थे।

– माहौल ऐसा था मानों किसी तरह की घटना ही नहीं हुई हो। हर आने-जाने वाले लोग नागेश्वर यादव से मिल रहे थे और जा रहे थे। लेकिन उनके चेहरे पर कोई शिकन ही नहीं था।

– पास बैठने और पूछने के बाद उनके मुहं से जाे बातें निकली वह जानकर किसी को भी हैरानी होगी। नागेशवर यादव काे दो बेटे हैं।

– उनका कहना है कि एक की उम्र ही नहीं रही नौकरी करने की, नहीं तो उसे भी देश के दुश्मनों से लड़ने के लिए बॉर्डर पर भेज देता। गम है कि अब देश काे मैं काेई सिपाही नहीं दे पाऊंगा।

मिलनसार थे मुन्ना यादव

– ब्रह्मा गांव में हर गली और हर घर में बस शहीद सैनिक किशोर कुमार मुन्ना के ही चर्चे हो रहे थे। हर कोई उनके स्वभाव और विचार के बारे में ही बातें कर रहा था।

– गांव की औरतें अलग-अलग झुंड बनाकर बस मुन्ना के साथ बिताए हुए पल को ही याद कर रहा था।

– गांव के बीच से गुजर रहे हरदिया गांव के हरिशंकर मलाकार को रोक कर पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह लड़का हर दिल अजीज था।

– एक बार एक बजे रात को वे इसी रास्ते से अपने गांव जा रहे थे। जब मुन्ना ने उन्हें रोक लिया था। उस समय उनकी सहायता की।

बोलते-बोलते पिता का गला रुंधाया

नागेश्वर ने बताया कि उनका लाडला जब छोटा था तो उसकी शरारत भी उसी तरह की थी। मुझे गीत गाना आता नहीं था और वह गीत गाने की जिद्द करता था। मैं उसका दिल रखने के लिए एक ही गीत गुनगुना देता था। यह कहते ही उनका गला रूंधा गया।

मां ने कहा- मुझे गर्व है मैं मुन्ना की मां हूं, वह शहीद हुआ है

– शहीद किशोर कुमार मुन्ना अपनी मां के आंखों का तारा था। उसके शहीद हो जाने के खबर जब से उसकी मां फूलो देवी को मिली है। फूलो देवी ने अन्न के एक भी दाने को हाथ नहीं लगाया है।

– बस अपने बेटे के अंतिम दर्शन के लिए पलकें बिछाए बैठीं हैं। रोते हुए कहती हैं कि मेरा एक बेटा शहीद हो गया। मैं तो मां हूं। अपने आप को कठोर नहीं बना सकती।

– लेकिन गौरव इस बात का है कि मेरा बेटा देश के लिए शहीद हुआ है। एक मां को छोड़ अगर उसने धरती मां की सेवा में अपनी जान की बाजी लगा दी तो इससे बड़ी बात उनके लिए क्या हो सकती है।

– कहते हैं लोग जन्म से लेकर मृत्यु तक अपने मां-बाप का कर्ज नहीं उतार सकते हैं। लेकिन मेरे लाल ने इस मिथक को तोड़ दिखाया है। अब मुझे इस बात का गर्व है कि मुझे इस जन्म में उसकी मां बनने का सौभाग्य मिला।

चचेरे भाई सरोज यादव को कटिहार ज्वाइंनिंग के लिए पहुंचाने जाने के दौरान मिली थी प्रेरणा

यूं तो देशभक्ति के बीज शहीद सैनिक किशोर कुमार मुन्ना के रग में उनके पिता नागेश्वर यादव ने देशभक्ति गीत गाकर भरे थे। लेकिन उनके जीवन काल का टर्निंग प्वाइंट एक जवान को पहुंचाने जाना रहा। ब्रह्मा गांव निवासी संजय यादव आर्मी के परीक्षा में पास होने वाले अपने चचेरे भाई सरोज यादव को कटिहार ज्वाइंनिंग के लिए पहुंचाने जा रहे थे। इस बात की भनक जब मुन्ना को लगी तो उसने भी साथ चलने की इच्छा जता दी और साथ हो लिया।

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