बिहार की ये गरीब बेटियां जित रही गोल्ड पर गोल्ड मेडल

0
984

ये कहानी है सीवान के हसनपुरा गांव की दो ऐसी सगी बहनों की, जिनके माथे से बचपन में ही मां का साया उठ गया. गरीबी ने ऐसा दामन पकड़ा कि कभी छोड़ा ही नहीं. बावजूद इसके सफलता की सीढ़ियां चढ़ती गयीं. विषम परिस्थितियों में भी जीत का इतिहास रचा.

इन दो बेटियों को शिखर तक पहुंचाने में घड़ीसाज पिता का सबसे बड़ा हाथ है. यही वजह है कि ये दोनों बहनें सात समंदर पार तक ग्रेपलिंग चैंपियनशिप में परचम लहरा रही हैं. जी हां, हम बात कर रहे हैं दीपा और श्वेता की. आइए आप भी पढ़िये इनकी सफलता की कहानी…

दीपा और श्वेता की उपलब्धियां

वर्ष 2015 में हरियाणा के रोहतक में नेशनल ग्रेपलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल. जनवरी, 2016 में इंडो-भूटान ग्रेपलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल. 2016 में दिल्ली में नौवीं ग्रेपलिंग नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल. जुलाई, 2016 में सुपौल में थर्ड स्टेट ग्रेपलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल. दिसंबर, 2016 में साउथ एशियन ग्रेपलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल. (नोट : श्वेता को इसमें सिल्वर मेडल मिला था)

मई, 2017 में लखीसराय में फोर्थ ग्रेपलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल. जुलाई, 2017 में दिल्ली में दसवीं नेशनल ग्रेपलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल. दिसंबर, 2017 में काठमांडो में सेकेंड साउथ एशियन ग्रेपलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल. अक्तूबर, 2017 में वर्ल्ड ग्रेपलिंग चैंपियनशिप में पांचवां स्थान.

मां के निधन के बाद रुक गयी थी दो साल तक पढ़ाई

दीपा कुमारी और छोटी बहन श्वेता सहित सभी भाई बहनों की पढ़ाई दो साल तक रुक गयी थी. इसकी वजह मां का देहांत होना था. वर्ष 2002 की बात है. दीपा तब मात्र नौ साल की थी. मां के निधन के बाद पिता भी सुध-बुध खो बैठे. घर में सबकुछ बिखर सा गया. पहले भी किसी तरह पिता राजेंद्र प्रसाद लोगों की घड़ियां ठीक करके गुजारा कर रहे थे. ऊपर से असमय पत्नी की मृत्यु ने उन्हें तोड़कर रख दिया.

खैर, बेटियों की सूरत देखकर उनके अंदर नयी शक्ति आयी. उन्होंने बच्चों के लिये जीने का मन बनाया. इसके बाद एक नयी जिंदगी की शुरुआत की. देर रात तक घड़ी की दुकान पर काम करते थे. ताकि कुछ ज्यादा आय हो सके. उधर, बेटियों ने भी ट्यूशन पढ़ा कर हाथ बंटाना शुरू किया. बकौल दीपा, पढ़ाई के साथ ग्रेपलिंग में भी अच्छा करना आसान नहीं था. पिता की मेहनत ने मुझे और मेरी बहन श्वेता को उड़ान भरने का जज्बा भरा. आज पिता जी के ही कारण हम दोनों बहनों के नाम इतने गोल्ड मेडल हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here