बिहार बोर्ड का नया कारनामा, अब 100 में 79 पाने वाले को भी कर दिया फेल

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अपने कारनामों को लेकर हमेशा से चर्चा में बने रहने वाली बिहार बोर्ड की एक और बड़ी लापरवाही सामने आई है। छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करते हुए बिहार बोर्ड के अधिकारी गलती के बाद भी उसे सुधारने का नाम नहीं ले रहे हैं। जिसको लेकर छात्रों को कोर्ट का सहारा लेना पड़ा है।

कुछ महीने पहले से सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर की प्रियंका कुमारी ने बिहार बोर्ड के खिलाफ हाईकोर्ट में मामला दर्ज किया था, जिसके बाद उसे न्याय मिला और सेकेंड टॉपर घोषित किया गया था। इसी तरह का एक और मामला सामने आया है जहां रोहतास जिले के धनंजय को हिंदी में 79 मार्क्स मिले थे लेकिन उन्हें सर्टिफिकेट पर 2 मार्क देते हुए फेल कर दिया गया।

जब इस बात की शिकायत बिहार बोर्ड के अधिकारी से की गई तो कोई भी सुनने को तैयार नहीं था। फिर आरटीआई के जरिए ये जानकारी मिली कि उनके हिंदी में 79 नंबर आए थे, जिसके बाद उन्होंने अपना रिजल्ट सुधरवाने के लिए बिहार बोर्ड का चक्कर लगाना शुरू किया। 79 नंबर मिलने के बावजूद फेल बोर्ड के अधिकारी गलती सुधारने की बजाए उसे आश्वासन पर आश्वासन देते चले गए पर अब तक उसके सर्टिफिकेट में सुधार नहीं किया गया। जिसकी वजह से धनंजय का भविष्य अंधेरे में लटका हुआ है।

जानकारी के मुताबिक मामला बिहार के रोहतास जिले का है, जहां के धनंजय कुमार नाम के छात्र को हिंदी में 79 नंबर मिलने के बावजूद अंकपत्र में सिर्फ दो नंबर दिए गए और उसे फेल घोषित कर दिया गया। कुछ ऐसा ही हाल सहरसा की प्रियंका के साथ भी बिहार बोर्ड के अधिकारियों ने किया था लेकिन उसने हाईकोर्ट में इस मामले को चैलेंज करते हुए चुनौती दी थी। जिसके बाद उसे जीत मिली और वो बिहार बोर्ड की सैकेंड टॉपर बनी। वहीं धनंजय का हाल वैसा नहीं था वो बिल्कुल गरीब परिवार से है, जिसके लिए वो लगातार बिहार बोर्ड के अधिकारियों से गुहार लगाता रहा पर उसे न्याय नहीं मिली।

कुल 84% अंक पाने वाला हिंदी में कर दिया गया फेल बिहार बोर्ड के अधिकारियों ने रोहतास के धनंजय के साथ भी ऐसा ही किया, उसे 84 प्रतिशत अंक मिले लेकिन हिंदी में सिर्फ दो नंबर देकर फेल कर दिया। अपने बारे में बताते हुए धनंजय का कहना है कि वो एक गरीब परिवार से आता है और उसके पिता नरेश यादव किसान हैं जो खेतीबाड़ी कर परिवार चलाते हैं। इसको लेकर हमारे पास कोर्ट में चैलेंज करने के लिए पैसे नहीं था, इसीलिए मैंने अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगाए।

मैंने पिछले साल हाई स्कूल तिलौथु से मैट्रिक का परीक्षा दी थी, जहां गणित में 96 नंबर मिलने के बाद भी बिहार बोर्ड ने हिंदी में सिर्फ दो नंबर देते हुए फेल कर दिया। जांच में खुली पोल जिसके बाद हम लोगों ने स्क्रूटनी के लिए आवेदन दिया लेकिन स्क्रूटनी में बोर्ड ने नंबर को यथावत रखते हुए कहा कि धनंजय को दो नंबर ही मिले। फिर मैंने आरटीआई के जरिए जवाब और अपनी कॉपी मांगी। जब कॉपी हम लोगों के हाथ लगी तो उसे देखकर हम लोग चौंक गए, क्योंकि हिंदी में हमें 79 अंक दिए गए थे लेकिन अंक पत्र पर सिर्फ दो नंबर देते हुए हमें फेल कर दिया गया था।

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