बिहार यूथ कांग्रेस चुनाव, धांधली की खबरें पहुंची शीर्ष नेतृत्व तक

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2005 में कांग्रेस महासचिव बनने के बाद से हीं राहुल गांधी ने यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई में बदलाव की कोशिशें शुरू की थी। राहुल गांधी ने यूथ कांग्रेस में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत पदाधिकारी चयन की व्यवस्था लागू की ।

शुरुआती चरण में देश भर के लाखों युवा बहुत हीं उम्मीदों के साथ इस सिस्टम का हिस्सा बनने के लिए आगे आएं लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया, चुनाव में भ्रष्टाचार की खबरें सामने आने लगी।

बिहार में भी राहुल की उम्मीदों को लगा पलीता

बिहार में अपनी सियासी जमीन तलाश रहे कांग्रेस के लिए 2010 में बड़ा मौका हाथ लगा था जब यूथ कांग्रेस के चुनाव में बिहार के लाखों युवाओं ने हिस्सा लिया, लेकिन दूसरे टर्म के चुनाव में वरिष्ठ नेताओं की दखलंदाजी इसमें सामने आने लगी तो नए युवा उससे दूर जाने लगें।

2013 में जब दुबारा चुनाव हुए तो संजीव सिंह नामक एक उम्मीदवार भारी अंतर से अध्यक्ष पद पर आसीन हुए लेकिन उसमें हस्तक्षेप कर डाला पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ शकील अहमद ने।

संजीव सिंह के किसी पुराने मामले का हवाला देकर उनकी छुट्टी कर दी गई और पेपर लीक करने के आरोप में सलाखों के भीतर से बाहर आये कुमार आशीष को विजयी घोषित कर दिया गया।

यहीं से बिहार में युवा कांग्रेस के बुरे दिन शुरू हो गए। लोकतांत्रिक व्यवस्था को धत्ता बताकर चेले- चपाटों को जबरन कमान देने की परिपाटी शुरू हुई।

इस बार भी धांधली की तैयारी

2019 का लोकसभा चुनाव सामने है। कांग्रेस अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है फिर भी ये ग्रैंड ओल्ड पार्टी सुधरने को तैयार नहीं है। एक बार फिर बड़े नेता अपने चेलों को सेट कराने के जुगाड़ में लग गए हैं।

बिहार में यूथ कांग्रेस के सांगठनिक चुनाव को कैसे बड़े नेताओं के दबाव में प्रभावित किया जा रहा है, इसकी झलक देखिए।

* 28 जुलाई को स्क्रूटनी होनी थी, अब तक नहीं हो सकी। उम्मीदवारों के नाम जोड़ने, हटाने के लिए हेर फेर के खेल की संभावना

* नियमतः 35 साल तक की अधिकतम उम्र सीमा के उम्मीदवार का नियम, 40 साल के लोगों को उम्मीदवारों की सूची में जबरन डाला गया

* 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस छोड़ दूसरी पार्टी से चुनाव लड़ने वाले बाबा तिवारी 2018 में कैसे बिहार के चुनाव प्रभारी बनें, इसे लेकर युवा कांग्रेस में सवाल खड़े !

कांग्रेस की कहानी भी अजीब है। इन बातों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कांग्रेस को भाजपा ने नहीं बल्कि पार्टी में घुसे ऐसे कमल छाप कांग्रेसियों ने ही बर्बाद किया है। कांग्रेस ने ऐसे लोगों को दल से बाहर का रास्ता नहीं दिखाया तो सचमुच मोदी- शाह का कांग्रेस मुक्त भारत का सपना साकार हो जाएगा।

 

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