पत्रकारिता की दुनिया में कभी नहीं मिटने वाला नाम है ‘बिहार की श्वेता सिंह’ का

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देश में मशहूर और नामचीन पत्रकारों की कोई कमी नहीं है. और जहां बात महिला पत्रकारों की आए और बिहार को याद किया जाय तो सबसे पहले श्वेता सिंह का चेहरा मन में उतरता है. भला उतरे भी कैसे नहीं ..श्वेता सिंह ने पत्रकारिता की दुनिया में जो छाप छोड़ी है वो कभी धूमिल नहीं हो सकती.

आज तक की जानी मानी पत्रकार श्वेता सिंह का जन्म 21 अगस्त 1977 को हुआ था. स्नातक की पढ़ाई उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से की है. जिस वक़्त वो पढ़ाई कर रही थी उसी वक़्त उन्होंने खुद को मीडिया से जोड़ लिया था. आज तक से जुड़ने से पहले श्वेता सिंह ने जी न्यूज और सहारा जैसे चैनल के साथ भी काम किया है. करीबन 20 साल से भी अधिक समय से श्वेता सिंह मीडिया से जुड़ीं हैं.

1998 में उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में कदम रखा था. जिसके बाद 2002 में उन्हें इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर पत्रकार बनने का मौका मिला. राजनीति से लेकर खेल , क्राइम लग भग हर क्षेत्र में श्वेता की पकड़ मजबूत है. वो सभी तरह के ख़बरों को बखूबी कवर करती हैं. लेकिन खेल जगत का उन्हें धाकड़ पत्रकार माना जाता है. बॉलीवुड की फिल्म चक्रव्यूह में उन्हें बतौर आज तक की एंकर के रूप में दिखाया गया था.

यूं तो श्वेता सिंह फिल्म निर्देशक बनना चाहती थीं लेकिन किस्मत ने उन्हें पत्रकार के रूप में चुना. और यह फैसला किस्मत का गलत साबित नहीं हुआ क्योंकि कई बार श्वेता सिंह बेस्ट एंकर का पुरस्कार दिया जा चुका है. हाल ही में उन्हें दादा साहेब फाल्के फिल्म फोंडेशन के बेस्ट जर्नलिस्ट अवॉर्ड से नवाजा गया है.

निजी जिंदगी में भी श्वेता सिंह एक निडर और हंसमुख महिला है. उनकी एक बेटी भी है. बिहार की बेटियों के लिए श्वेता सिंह मिसाल हैं. उनका मुकाम ना सिर्फ किसी को आगे बढ़ने की सीख देता है बल्कि यह भी सिखाता है कि जिंदगी के फैसलों में इंसान अगर जिंदगी का साथ दे तो जिंदगी आपका दोहरा साथ देती है.

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